प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत गरीब परिवारों के पात्र वरिष्ठ नागरिकों को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। इस योजना को ग्रामीण विकास विभाग राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के सहयोग से लागू करता है। योजना के तहत 60 से 79 वर्ष की आयु के पात्र बुजुर्गों को केंद्र सरकार की ओर से हर महीने ₹200, जबकि 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को ₹500 प्रति माह पेंशन मिलती है। इसके अलावा, संबंधित राज्य सरकार भी अपनी ओर से अतिरिक्त राशि दे सकती है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14 अक्टूबर 2026 को इस योजना का नया नाम मंजूर किया था।
प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना की मुख्य जानकारी | |
|---|---|
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना |
| पुराना नाम | इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS) |
| मुख्य कार्यक्रम | प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना |
| नाम बदलने की तारीख | 14 अक्टूबर 2026 |
| मंजूरी देने वाली संस्था | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल |
| कार्यान्वयन करने वाला विभाग | ग्रामीण विकास विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय |
| कार्यक्रम का कुल बजट | वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक ₹53,428 करोड़ |
| कार्यक्रम के लाभार्थी | सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 3.20 करोड़ लाभार्थी |
| 60 से 79 वर्ष की आयु के लिए केंद्रीय पेंशन | ₹200 प्रति माह |
| 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लिए केंद्रीय पेंशन | ₹500 प्रति माह |
| राज्य सरकार की अतिरिक्त सहायता | राज्य के अनुसार ₹50 से ₹3,800 प्रति माह |
| पात्रता | भारत के ऐसे नागरिक जिनकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है और जो निर्धारित गरीबी रेखा से नीचे (BPL) आने वाले पात्र परिवारों से संबंधित हैं |
| लाभार्थी का योगदान | कोई योगदान नहीं; यह गैर-अंशदायी योजना है |
| पेंशन भुगतान का तरीका | लाभार्थी के बैंक या डाकघर खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से |
| आवेदन कहाँ करें | ग्राम पंचायत, ब्लॉक कार्यालय, नगर निकाय कार्यालय, जिला समाज कल्याण कार्यालय या राज्य के आधिकारिक पेंशन पोर्टल पर |
| आधिकारिक पोर्टल | अपने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के संबंधित सरकारी पेंशन पोर्टल पर जानकारी देखें। |
प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना का परिचय: एक संक्षिप्त जानकारी
भारत में कई बुजुर्ग ऐसे हैं जिनके पास बुढ़ापे में खर्च चलाने के लिए न तो पर्याप्त बचत होती है, न नियमित आय और न ही कोई अन्य पेंशन। जब उम्र बढ़ने के कारण उनके लिए काम करना मुश्किल हो जाता है, तब दवाइयों, भोजन और रोजमर्रा की दूसरी जरूरतों को पूरा करना भी चुनौती बन जाता है। ऐसे वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक सहारा देने के लिए प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत हर महीने पेंशन दी जाती है।
इस योजना का नाम पहले इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना था। 14 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसका नाम बदलने की मंजूरी दी। अब यह योजना प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना के अंतर्गत संचालित होती है। इस व्यापक कार्यक्रम के लिए वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक ₹53,428 करोड़ का बजट मंजूर किया गया है। इसके माध्यम से लगभग 3.20 करोड़ लाभार्थियों तक सहायता पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय का ग्रामीण विकास विभाग राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के साथ मिलकर इस योजना को लागू करता है। इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के पात्र बुजुर्गों को नियमित वित्तीय सहायता देना है, ताकि वे बुढ़ापे में अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें और सम्मान के साथ जीवन बिता सकें।
केंद्र सरकार 60 से 79 वर्ष की आयु के पात्र बुजुर्गों को ₹200 प्रति माह और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को ₹500 प्रति माह देती है। इसके अलावा, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी ओर से भी पेंशन में अतिरिक्त राशि जोड़ सकते हैं। यह अतिरिक्त सहायता अलग-अलग राज्यों में ₹50 से ₹3,800 प्रति माह तक हो सकती है। इसलिए लाभार्थियों को मिलने वाली कुल पेंशन उनके राज्य के नियमों पर निर्भर करती है। कई राज्यों में केंद्र और राज्य सरकार की सहायता मिलाकर औसतन लगभग ₹1,000 प्रति माह पेंशन मिलती है।
भारत के ऐसे नागरिक जिनकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है और जो निर्धारित मानदंडों के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे (BPL) आने वाले पात्र परिवारों से संबंधित हैं, इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। पात्रता की शर्तें पूरी करने पर महिला और पुरुष, दोनों को पेंशन मिल सकती है। इस योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थियों को कोई प्रीमियम या अंशदान नहीं देना पड़ता।
आवेदन करने के लिए आप अपनी ग्राम पंचायत, ब्लॉक कार्यालय, नगर निकाय कार्यालय या जिला समाज कल्याण कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। कई राज्य सरकारें अपने आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी आवेदन स्वीकार करती हैं। केवल योजना का नाम बदलने के कारण मौजूदा पेंशन लाभार्थियों को दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं है। किसी भी सहायता के लिए अपने स्थानीय ब्लॉक या जिला कार्यालय से संपर्क करें।
आप हमारी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना से संबंधित पुरानी गाइड भी पढ़ सकते हैं। इसके अलावा, प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना के बारे में विस्तार से जान सकते हैं, जिसके अंतर्गत यह पेंशन योजना आती है। 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को निर्धारित शर्तें पूरी करने पर आयुष्मान भारत वय वंदना कार्ड के तहत ₹5 लाख तक का मुफ्त स्वास्थ्य कवर भी मिल सकता है।
वरिष्ठ नागरिक, उनके परिवार और अन्य पाठक केंद्र सरकार की सामाजिक सुरक्षा तथा जनकल्याण योजनाओं के बारे में अधिक जानकारी के लिए हमारी केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की सूची भी देख सकते हैं।
पात्र लाभार्थियों को मिलने वाले फायदे
प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत केंद्र सरकार पात्र वरिष्ठ नागरिकों को हर महीने पेंशन देती है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें इस राशि में अपनी ओर से अतिरिक्त सहायता भी जोड़ सकती हैं। इससे गरीब परिवारों के बुजुर्गों को बुढ़ापे में रोजमर्रा के जरूरी खर्च पूरे करने में मदद मिलती है।
- 60 से 79 वर्ष की आयु के पात्र लाभार्थियों को केंद्र सरकार की ओर से ₹200 प्रति माह।
- 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को केंद्र सरकार की ओर से ₹500 प्रति माह।
- लाभार्थी के 80 वर्ष की आयु पूरी करने पर केंद्रीय पेंशन की राशि बढ़कर ₹500 प्रति माह हो जाती है।
- राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सरकार की ओर से ₹50 से ₹3,800 प्रति माह तक अतिरिक्त आर्थिक सहायता।
- कई राज्यों में राज्य सरकार के योगदान सहित लगभग ₹1,000 प्रति माह की कुल पेंशन।
- पेंशन पाने के लिए लाभार्थी को कोई अंशदान या प्रीमियम नहीं देना पड़ता।
- पेंशन की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक या डाकघर खाते में भेजी जाती है।
योजना की पात्रता शर्तें
प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के ऐसे बुजुर्गों को सहायता दी जाती है, जिन्हें बुढ़ापे में आर्थिक सहारे की जरूरत होती है। पेंशन प्राप्त करने के लिए आवेदकों को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होंगी।
- आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए।
- आवेदक की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
- आवेदक को निर्धारित मानदंडों के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे (BPL) आने वाले पात्र परिवार से संबंधित होना चाहिए।
- महिला और पुरुष, दोनों आवेदन कर सकते हैं।
- आयु की कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं है।
- आवेदक को सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी के रूप में पेंशन नहीं मिलनी चाहिए।
- 60 से 79 वर्ष की आयु की BPL विधवाएँ और गंभीर दिव्यांगता वाले व्यक्ति संबंधित विधवा या दिव्यांग पेंशन योजना के तहत भी पात्र हो सकते हैं। इसके लिए संबंधित योजना की शर्तें पूरी करना जरूरी है।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना के लिए आवेदन करते समय आवेदकों को अपनी आयु, आर्थिक स्थिति और निवास का प्रमाण देना होता है। जरूरी दस्तावेज राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के अनुसार कुछ अलग हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर निम्नलिखित दस्तावेज मांगे जाते हैं।
- आधार कार्ड
- आयु प्रमाण के लिए जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल प्रमाण पत्र, मतदाता पहचान पत्र या अन्य मान्य दस्तावेज
- BPL राशन कार्ड या गरीबी रेखा से नीचे होने का अन्य मान्य प्रमाण
- संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का निवास प्रमाण
- खाता संख्या और IFSC कोड वाली बैंक या डाकघर की पासबुक
- हाल ही में खिंचवाई गई पासपोर्ट आकार की फोटो
- आवेदन से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के लिए मोबाइल नंबर
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कैसे करें?
केंद्र सरकार इस योजना के लिए धनराशि उपलब्ध कराती है, लेकिन आवेदन स्वीकार करने और आवेदकों की जानकारी की जाँच करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की होती है। इसलिए आवेदन की प्रक्रिया आपके निवास स्थान के अनुसार अलग हो सकती है। आमतौर पर आप नजदीकी सरकारी कार्यालय में जाकर आवेदन कर सकते हैं। कुछ राज्य ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी देते हैं। अपने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में उपलब्ध प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करें।
तरीका 1: गाँव या ग्रामीण क्षेत्र में ऑफलाइन आवेदन करें
चरण 1: अपनी ग्राम पंचायत या ब्लॉक विकास कार्यालय (BDO) में जाएँ और वृद्धावस्था पेंशन के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी लें।
चरण 2: संबंधित अधिकारियों से वृद्धावस्था पेंशन योजना का आवेदन फॉर्म माँगें। फॉर्म भरने से पहले उनसे योजना का सही नाम भी पूछ लें।
चरण 3: फॉर्म में अपना नाम, आयु, आवासीय पता और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी भरें। फॉर्म जमा करने से पहले सभी विवरण ध्यान से जाँच लें।
चरण 4: अपने राज्य की आवश्यकताओं के अनुसार आधार कार्ड, आयु प्रमाण, BPL प्रमाण, बैंक या डाकघर की पासबुक और हाल ही की पासपोर्ट आकार की फोटो की प्रतियाँ संलग्न करें।
चरण 5: भरा हुआ फॉर्म और जरूरी दस्तावेज संबंधित अधिकारी के पास जमा करें। आवेदन जमा करने के बाद रसीद या पावती जरूर लें, ताकि आगे आवेदन की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।
तरीका 2: कस्बे या शहर में ऑफलाइन आवेदन करें
चरण 1: अपने नगर निकाय कार्यालय या जिला समाज कल्याण कार्यालय में जाएँ और पता करें कि वृद्धावस्था पेंशन के लिए आवेदन कहाँ जमा करना है।
चरण 2: आवेदन फॉर्म प्राप्त करें और उसमें अपनी व्यक्तिगत जानकारी, आयु तथा बैंक खाते का विवरण सही-सही भरें।
चरण 3: सभी जरूरी दस्तावेज फॉर्म के साथ लगाकर संबंधित अधिकारी के पास जमा करें। भविष्य में आवेदन से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के लिए पावती या आवेदन संख्या अपने पास सुरक्षित रखें।
तरीका 3: राज्य के पोर्टल से ऑनलाइन आवेदन करें
चरण 1: अपने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के आधिकारिक समाज कल्याण या पेंशन पोर्टल पर जाएँ। आवेदन के लिए केवल सरकारी वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें।
चरण 2: पोर्टल पर वृद्धावस्था पेंशन का विकल्प खोजें। इसके बाद पोर्टल पर माँगी गई जानकारी के अनुसार पंजीकरण करें या अपने खाते में लॉगिन करें। इसमें आधार नंबर और मोबाइल नंबर जैसी जानकारी माँगी जा सकती है।
चरण 3: आवेदन फॉर्म में अपना नाम, आयु, पता और बैंक खाते से संबंधित विवरण भरें। इसके बाद जरूरी दस्तावेजों की स्कैन की हुई प्रतियाँ अपलोड करें।
चरण 4: फॉर्म जमा करने से पहले सभी जानकारियाँ जाँच लें। आवेदन जमा करने के बाद आवेदन संख्या और पावती को सुरक्षित रखें या उसका प्रिंट निकाल लें।
तरीका 4: UMANG पोर्टल या ऐप से ऑनलाइन आवेदन करें
चरण 1: UMANG के आधिकारिक पोर्टल पर जाएँ या अपने स्मार्टफोन में UMANG मोबाइल ऐप खोलें।
चरण 2: प्लेटफॉर्म पर माँगी गई जानकारी के अनुसार अपने UMANG खाते में पंजीकरण करें या लॉगिन करें। यदि आप पहली बार इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, तो पहले पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करें।
चरण 3: उपलब्ध सेवाओं में वृद्धावस्था पेंशन योजना या प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना खोजें। यदि आपके राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के लिए संबंधित पेंशन सेवा उपलब्ध है, तो उसे चुनें।
चरण 4: आवेदन फॉर्म में अपना नाम, आयु, पता और बैंक खाते की जानकारी भरें। जहाँ पोर्टल माँगे, वहाँ आधार कार्ड, आयु प्रमाण और BPL प्रमाण जैसे जरूरी दस्तावेज अपलोड करें।
चरण 5: आवेदन में भरी गई सभी जानकारियों की जाँच करें और फॉर्म जमा कर दें। आवेदन की स्थिति बाद में देखने के लिए आवेदन संख्या या संदर्भ संख्या सुरक्षित रखें।
महत्वपूर्ण: UMANG पर उपलब्ध पेंशन सेवाएँ अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग हो सकती हैं। यदि आपको वृद्धावस्था पेंशन की संबंधित सेवा नहीं मिलती है, तो अपने राज्य के आधिकारिक पेंशन पोर्टल पर जाएँ या संबंधित समाज कल्याण विभाग से संपर्क करें।
आवेदन जमा करने के बाद क्या होता है?
चरण 1: संबंधित अधिकारी आपकी आयु, BPL स्थिति, दस्तावेजों और पात्रता से जुड़ी अन्य जानकारियों की जाँच करते हैं।
चरण 2: जिम्मेदार ब्लॉक, जिला या अन्य अधिकृत अधिकारी आपके आवेदन की समीक्षा करते हैं और तय करते हैं कि आप पेंशन के लिए पात्र हैं या नहीं।
चरण 3: आवेदन मंजूर होने पर संबंधित अधिकारी आपके राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नियमों के अनुसार पेंशन भुगतान की प्रक्रिया शुरू करते हैं। आमतौर पर पेंशन की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे आपके बैंक या डाकघर खाते में भेजी जाती है।
अपनी पेंशन से जुड़ी जानकारी कैसे देखें?
चरण 1: ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना पोर्टल पर जाएँ।
चरण 2: पोर्टल पर उपलब्ध लाभार्थी विवरण, पेंशन की स्थिति या भुगतान रिपोर्ट से संबंधित विकल्प खोजें। जहाँ ये सुविधाएँ उपलब्ध हों, वहाँ संबंधित विकल्प चुनकर अपनी जानकारी देखें।
चरण 3: यदि पेंशन मिलने में देरी हो रही है, तो पहले अपने बैंक खाते का विवरण जाँचें। इसके बाद सहायता के लिए ब्लॉक, जिला या संबंधित पेंशन कार्यालय से संपर्क करें। अधिकारियों से पूछें कि कहीं आपको किसी जानकारी में सुधार या अतिरिक्त सत्यापन की प्रक्रिया तो पूरी नहीं करनी है।
महत्वपूर्ण: योजना का नाम बदलने से जुड़ी जानकारी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल की आधिकारिक घोषणा पढ़ें। यदि आपको पहले से पेंशन मिल रही है, तो केवल योजना का नाम बदलने के कारण नया आवेदन जमा न करें। किसी भी जरूरी कार्रवाई के लिए संबंधित पेंशन अधिकारी से निर्देश प्राप्त करें।
IGNOAPS से प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना तक: क्या बदलाव हुए?
वृद्धावस्था पेंशन योजना में समय-समय पर बदलाव हुए हैं। इन बदलावों में योजना का नाम, पात्रता की न्यूनतम आयु और वित्तीय सहायता से जुड़े फैसले शामिल हैं। नीचे वर्ष 1995 में योजना की शुरुआत से लेकर वर्ष 2026 में इसका नाम बदलने तक की प्रमुख घटनाएँ दी गई हैं।
| वर्ष | प्रमुख बदलाव |
|---|---|
| 15 अगस्त 1995 | पात्र बुजुर्गों को आर्थिक सहायता देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर वृद्धावस्था पेंशन कार्यक्रम शुरू किया गया। |
| 2007 | योजना का नाम बदलकर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS) रखा गया। इसके अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे (BPL) आने वाले पात्र बुजुर्गों को पेंशन के दायरे में शामिल किया गया। |
| 2011 | पेंशन के लिए न्यूनतम पात्रता आयु 65 वर्ष से घटाकर 60 वर्ष कर दी गई। साथ ही, 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों के लिए केंद्रीय पेंशन बढ़ाकर ₹500 प्रति माह कर दी गई। |
| 14 अक्टूबर 2026 | केंद्रीय मंत्रिमंडल ने योजना का नया नाम प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना मंजूर किया और इसे वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी। |
किन बातों में बदलाव नहीं हुआ?
- मासिक पेंशन: केंद्र सरकार की ओर से 60 से 79 वर्ष के लाभार्थियों को ₹200 और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को ₹500 प्रति माह मिलते हैं।
- आयु और आय संबंधी शर्तें: आवेदक की आयु कम से कम 60 वर्ष होनी चाहिए और उसे निर्धारित मानदंडों के अनुसार पात्र BPL परिवार से संबंधित होना चाहिए।
- मौजूदा लाभार्थी: केवल योजना का नाम बदलने के कारण पहले से पेंशन पाने वाले लोगों को नया आवेदन जमा करने की जरूरत नहीं है।
योजना में क्या बदलाव हुए?
- योजना का नया नाम: अब इस योजना को प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना कहा जाता है।
- मुख्य कार्यक्रम: अब यह योजना प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना के अंतर्गत संचालित होती है।
- वित्तीय मंजूरी: योजना को अगले पाँच वर्षों के लिए मंजूरी मिली है। वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक इसके लिए ₹53,428 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है।
राज्य सरकार की अतिरिक्त सहायता से मासिक पेंशन पर क्या असर पड़ता है?
केंद्र सरकार 60 से 79 वर्ष की आयु के पात्र लाभार्थियों को हर महीने ₹200 और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों को ₹500 की निश्चित पेंशन देती है। हालाँकि, लाभार्थी को मिलने वाली कुल राशि इस बात पर निर्भर करती है कि संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश अपनी ओर से कितनी अतिरिक्त आर्थिक सहायता देता है।
| पेंशन का हिस्सा | योगदान देने वाली सरकार | मासिक राशि |
|---|---|---|
| केंद्रीय पेंशन (60 से 79 वर्ष) | भारत सरकार | ₹200 |
| केंद्रीय पेंशन (80 वर्ष या उससे अधिक) | भारत सरकार | ₹500 |
| राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की अतिरिक्त सहायता | संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सरकार | ₹50 से ₹3,800 |
अलग-अलग राज्यों में पेंशन की राशि अलग क्यों होती है?
- राज्य सरकारों का अलग-अलग योगदान: प्रत्येक राज्य या केंद्र शासित प्रदेश अपनी ओर से दी जाने वाली अतिरिक्त पेंशन राशि तय करता है। इसलिए अलग-अलग स्थानों पर कुल पेंशन की राशि भी अलग होती है।
- औसत पेंशन: कई राज्यों में केंद्र और राज्य सरकार की सहायता मिलाकर लगभग ₹1,000 प्रति माह पेंशन मिलती है।
- अधिक लोगों को लाभ: कुछ राज्य अपने नियमों के तहत केंद्र सरकार की पात्रता शर्तों से अलग मानदंड अपनाकर अधिक बुजुर्गों को पेंशन का लाभ दे सकते हैं।
- अपनी पेंशन की राशि पता करें: आपको कितनी पेंशन मिलेगी, इसकी सही जानकारी के लिए अपने राज्य के समाज कल्याण विभाग या संबंधित पेंशन कार्यालय से संपर्क करें।
अक्टूबर 2026 में योजना का नाम बदलने का वरिष्ठ नागरिकों पर क्या असर होगा?
- योजना का नया नाम: 14 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना करने की मंजूरी दी।
- पाँच वर्षों के लिए वित्तीय मंजूरी: अब प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना के नाम से संचालित व्यापक कार्यक्रम के लिए वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक ₹53,428 करोड़ का बजट मंजूर किया गया है। इसके तहत लगभग 3.20 करोड़ लाभार्थियों को कवर करने का अनुमान है।
- पेंशन की मौजूदा दरें जारी: केंद्र सरकार की ओर से पात्र 60 से 79 वर्ष के बुजुर्गों को ₹200 और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों को ₹500 प्रति माह मिलते रहेंगे। पात्रता की मौजूदा शर्तों में भी बदलाव नहीं हुआ है।
- नया आवेदन देने की जरूरत नहीं: केवल योजना का नाम बदलने के कारण मौजूदा पेंशन लाभार्थियों को दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं है। नए आवेदकों को संबंधित स्थानीय कार्यालय या राज्य के आधिकारिक पेंशन पोर्टल के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
योजना से संबंधित महत्वपूर्ण लिंक
- प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना का आधिकारिक पोर्टल (NSAP)
- IGNOAPS का नाम बदलकर प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना करने से जुड़ा केंद्रीय मंत्रिमंडल का फैसला
- भारत सरकार का ग्रामीण विकास मंत्रालय
- पेंशन सेवाओं के लिए UMANG ऐप
सहायता के लिए संपर्क विवरण
- केंद्रीय मंत्रालय: ग्रामीण विकास विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय, कृषि भवन, नई दिल्ली – 110001
- राज्य स्तर: अपने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का समाज कल्याण या सामाजिक न्याय विभाग
- जिला स्तर: जिला समाज कल्याण अधिकारी
- स्थानीय स्तर: ब्लॉक विकास कार्यालय, ग्राम पंचायत या नगर निकाय कार्यालय
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तर: प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना केंद्र सरकार की एक पेंशन योजना है। इसके तहत गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवनयापन करने वाले पात्र वरिष्ठ नागरिकों को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। पहले इस योजना को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS) के नाम से जाना जाता था।
उत्तर: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14 अक्टूबर 2026 को योजना के नए नाम को मंजूरी दी।
उत्तर: नहीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, योजना के तहत मिलने वाली पेंशन की राशि और पात्रता की शर्तें पहले जैसी ही हैं। केवल नाम बदलने के कारण मौजूदा पेंशन लाभार्थियों को दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं है।
उत्तर: केंद्र सरकार 60 से 79 वर्ष की आयु के पात्र लाभार्थियों को ₹200 प्रति माह और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को ₹500 प्रति माह पेंशन देती है।
उत्तर: राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारें केंद्र सरकार से मिलने वाली पेंशन में अपनी ओर से भी राशि जोड़ सकती हैं। प्रत्येक राज्य में यह अतिरिक्त राशि अलग-अलग हो सकती है। इसी वजह से लाभार्थियों को मिलने वाली कुल मासिक पेंशन में अंतर देखने को मिलता है।
उत्तर: 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के भारतीय नागरिक, जो पात्र गरीबी रेखा से नीचे (BPL) परिवारों से संबंधित हैं, इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, उन्हें योजना की अन्य निर्धारित पात्रता शर्तें भी पूरी करनी होंगी।
उत्तर: हां। निर्धारित आयु और अन्य पात्रता शर्तें पूरी करने वाले पुरुष और महिलाएं, दोनों इस योजना के तहत पेंशन प्राप्त कर सकते हैं।
उत्तर: नहीं। केवल योजना का नाम बदलने के कारण मौजूदा लाभार्थियों को नया आवेदन जमा करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, उन्हें अपने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के पेंशन विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना चाहिए।
उत्तर: नहीं। यह एक गैर-अंशदायी पेंशन योजना है। पात्र लाभार्थियों को पेंशन प्राप्त करने के लिए कोई प्रीमियम देने या नियमित रूप से पैसा जमा करने की जरूरत नहीं होती।
उत्तर: आवेदन की प्रक्रिया जानने के लिए आप अपनी ग्राम पंचायत, ब्लॉक कार्यालय, नगर पालिका कार्यालय या जिला समाज कल्याण कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, आप अपने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के आधिकारिक पेंशन पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी देख सकते हैं।
उत्तर: आमतौर पर सरकार प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से पेंशन की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते या डाकघर खाते में भेजती है। हालांकि, भुगतान की प्रक्रिया संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नियमों के अनुसार हो सकती है।
उत्तर: आप अपने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के आधिकारिक पेंशन पोर्टल पर जाकर लाभार्थी की जानकारी और भुगतान का स्टेटस देख सकते हैं। यदि यह जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है, तो संबंधित पेंशन कार्यालय से संपर्क करें।
उत्तर: दी गई जानकारी के अनुसार, इस योजना के लिए वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक की अवधि के लिए ₹53,428 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है।
उत्तर: पात्र वरिष्ठ नागरिक विधवा महिला निर्धारित शर्तें पूरी करने पर वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त कर सकती है। उपलब्ध जानकारी में 40 से 79 वर्ष की आयु की पात्र BPL विधवा महिलाओं के लिए एक अलग विधवा पेंशन योजना का भी उल्लेख है। इसलिए आवेदन करने से पहले अपने राज्य के नियमों की जांच करें, ताकि यह पता चल सके कि आप किस पेंशन योजना के लिए पात्र हैं।
उत्तर: नहीं। दोनों योजनाओं का उद्देश्य अलग-अलग है। प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना के तहत गरीब परिवारों के पात्र वरिष्ठ नागरिकों को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। वहीं, प्रधानमंत्री वय वंदना योजना एक निवेश-आधारित पेंशन योजना थी।

तबस्सुम पिछले 5 वर्षों से केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं पर शोध और लेखन कार्य कर रही हैं। अब तक कृषि, महिला कल्याण, शिक्षा और आवास जैसे क्षेत्रों की 500 से अधिक योजनाओं की जानकारी सरल हिंदी भाषा में प्रदान की है, ताकि हर पात्र नागरिक अपने अधिकारों को समझ सके और योजनाओं का लाभ उठा सके।
